बलिया

बलिया

बलिया जिला:- 
बलिया जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ मंडल के अन्तर्गत आता है, बलिया जिला उत्तर प्रदेश का सबसे पूर्वी जिला है, जिसका मुख्यालय बलिया शहर है। बलिया जिले की उत्तरी और दक्षिणी सीमा क्रमशः सरयू और गंगा नदियों द्वारा बनाई जाती है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस जिले के निवासियों के विद्रोही तेवर के कारण इसे बागी बलिया के नाम से भी जाना जाता है। ददरी-मेला यहाँ का प्रसिद्ध मेला है जो आश्विन मास में शहर की पूर्वी सीमा पर गंगा और सरयू नदियों के संगम पर स्थित एक मैदान पर मनाया जाता है। मऊ, आजमगढ़, देवरिया, गाजीपुर और वाराणसी के रूप में पास के जिलों के साथ नियमित संपर्क में रेल और सड़क के माध्यम से मौजूद है। यह बिहार की सीमा को छूता हुआ जिला है। इनके बाद मऊ जिला शुरू हो जाता है।

 
जिले के बारे मेंबलिया उत्तर प्रदेश के चरम उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। यह पश्चिम में मऊ, उत्तर में देवरिया, उत्तर-पूर्वी भाग में बिहार और दक्षिण पश्चिमी भाग में गाजीपुर से घिरा हुआ है। शहर एक अनियमित आकार में है और दो प्रमुख नदियों के संगम पर स्थित है| गंगा और घागरा, ये नदियां शहर को दूसरे पड़ोसी शहरों से अलग करती हैं। जैसे गंगा बिहार से और घागरा देवरिया से बलिया को अलग करती है। बलिया शहर, वाराणसी से सिर्फ एक सौ तीस-पैंतीस किलोमीटर दूर है। बलिया की उत्पत्तिबलिया नाम की उत्पत्ति के पीछे दो कहानियाँ हैं सबसे पहले, यह माना जाता है कि बलिया शहर का नाम भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध संत वाल्मीकि के नाम से लिया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि वाल्मीकि, रामायण  के लेखक इस शहर में रहते थे|दूसरी कहानी के मुताबिक,मिट्टी की गुणवत्ता के कारण शहर को बलिया के रूप में नाम दिया गया है। बलिया में एक रेतीली मिट्टी होती है और इस प्रकार की मिट्टी को ‘बल्लुआ’ के रूप में जाना जाता है|यह माना जाता है कि इस शहर को शुरू में ‘बालियान’ कहा जाता था और फिर ‘बलिया’ के रूप में बदल दिया गया था

बलिया ज़िले में छ्ह तहसीलें हैं - बलिया, बैरिया, बाँसडीह, बेलथरा रोड, रसड़ा और सिकंदरपुर।

इतिहास : 
बलिया 1 नवम्बर सन् 1879 में गाजीपुर से अलग हुआ। लगातार अशान्त रहने के कारण अग्रेजों ने इसे गाजीपुर से अलग कर दिया। 1942 के आंदोलन में बलिया के निवासियों ने स्थानीय अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंका था। चित्तू पांडेय के नेतृत्व में कुछ दिनों तक स्थानीय सरकार भी चली, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने वापस अपनी सत्ता कायम कर ली।भारत के पूर्व प्रधान मन्त्री चन्द्रशेखर भी इसी जिले के मूल निवासी थे। आपात काल के बाद हुई क्राति के जनक तथा महान स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण भी इसी जिले के मूल निवासी थे। समाजवादी चिंतक तथा देश में 'छोटे लोहिया' के नाम से विख्यात जनेश्वर मिश्र भी यही के निवासी थे| वीर लोरिक का इतिहास इस जिला से जुड़ा हुआ है उनकी वीरता के बारे में ये कहा गया है कि उन्होंने अपनी तलवार से ही पत्थर को दो हिस्सों में अलग अलग कर दिया आज भी वह पत्थर मौजूद है बलिया को बागी बलिया के नाम से भी जाना जाता है | बलिया का चुनावी इतिहास भी काफी रोचक रहा है पहले यहाँ विधान सभा की आठ सीटे थी पर वर्तमान समय मे सात सीटे है।

बलिया ज़िले में छ्ह तहसीलें हैं - बलिया, बैरिया, बाँसडीह, बेलथरा रोड, रसड़ा और सिकंदरपुर।

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